सुभद्रा कुमारी चौहान 10th - - जरूर।’’ इतना कहकर फौरन एक डिब्बा सावित्री के सामने सरकाते हुए कहा- ‘’तुम और कुछ मत देखो मां, यह हींग एक नंबर है, हम तुम्हें धोखा नहीं देगा।’’ वह उसी स्वर में फिर बोला-’’हेरा हींग है मां, हमको तुम्हारे हाथ की बोहनी लगती है। एक ही तोला ले लो, पर लो जरूर।’’ इतना कहकर फौरन एक डिब्बा सावित्री के सामने सरकाते हुए कहा- ‘’तुम और कुछ मत देखो मां, यह हींग एक नंबर है, हम तुम्हें धोखा नहीं देगा।’’ सावित्री बोली- ‘’पर हींग लेकर करूंगी क्या? ढेर-सी तो रखी है।’’ खान ने कहा-’’कुछ भी ले लो अम्मां! हम देने के लिए आया है, घर में पड़ी रहेगी। हम अपने देश कूं जाता है। खुदा जाने, कब लौटेगा?’’ और खान बिना उत्तर की प्रतीक्षा किए हींग तोलने लगा। इस पर सावित्री के बच्चे नाराज हुए। सभी बोल उठे-’’मत लेना मां, तुम कभी न लेना। जबरदस्ती तोले जा रहा है।’’ सावित्री ने किसी की बात का उत्तर न देकर, हींग की पुड़िया ले ली। पूछा-’’कितने पैसे हुए खान?’’ ‘’पैंतीस पैसे अम्मां!’’ खान ने उत्तर दिया। सावित्री ने सात पैसे तोले के भाव से पांच तोले का दाम, पैंतीस पैसे लाकर खान को दे दिए। खान सलाम करके चला गया। पर बच्चों को मां की यह बात अच्छी न लगीं। बड़े लड़के ने कहा-’’मां, तुमने खान को वैसे ही पैंतीस पैसे दे दिए। हींग की कुछ जरूरत नहींथी।’’ छोटा मां से चिढ़कर बोला-’’दो मां, पैंतीस पैसे हमको भी दो। हम बिना लिए न रहेंगे।’’ लड़की जिसकी उम्र आठ साल की थी, बड़े गंभीर स्वर में बोली-’’तुम मां से पैसा न मांगो। वह तुम्हें न देंगी। उनका बेटा वही खान है।’’ सावित्री को बच्चों की बातों पर हँसी आ रही थी। उसने अपनी हँसी दबाकर बनावटी क्रोध से कहा-’’चलो-चलो, बड़ी बातें बनाने लग गए हो। खाना तैयार है, खाओ। ‘’ छोटा बोला- ‘’पहले पैसे दो। तुमने खान को दिए हैं।’’ 10th - - सावित्री ने कहा- ‘’खान ने पैसे के बदले में हींग दी है। तुम क्या दोगे?’’ छोटा बोला- ‘’ मिट्टी देंगे।’’ सावित्री हँस पड़ी- ‘’अच्छा चलो, पहले खाना खा लो,
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सुभद्रा कुमारी चौहान
Chapter 19: सुभद्रा कुमारी चौहान · Hindi
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