सार्वजनिक शिक्षा की आवश्यकता है। इसके लिए 10th - - स्पष्टता का निवारण और जाति-पाँति के कठोर बंधनों को तोड़ना भी जरूरी है। लोकतंत्र अभ्यास का विषय है, कि वह लोकतंत्र का पाठ पढ़ने से और उसका नारा लगाने से उसकी स्थापना नहीं होती है। इसलिए सहयोग का प्रचार कर सामाजिक संबंधों को बदलना तथा नई आर्थिक पद्धति को प्रतिष्ठित करना नितांत आवश्यक है।
सुंदर भविष्य के निर्माण के लिए आज सर्वसाधारण से त्याग की अपील करनी है, कि ं तु जब तक कोई ऐसा उद्देश्य समाज के सम्मुख नहीं रखा जाता जिसके लिए लोग श्रम करें, तब तक त्याग की आशा करना व्यर्थ है। इन सब कामों के लिए युवक की आदर्शप्रियता, उसकी निर्भीकता, उसका साहस, उसकी लगन चाहिए। यह तभी हो सकता है जब हम युवक के अधिकार को स्वीकार करें। यदि हम इस विषय में अपने कर्तव्य का पालन ना करेंगे तो भय है कि हमारा युवक गैर-जिम्मेदार ना हो जाए।
विद्यार्थी समाज की उच्छृंखलता, विदेशी शासन से लड़ने का एक अनिवार्य फल है। एक अर्थ में कांग्रेस कार्यकर्ता भी उच्छृंखलताथे। कि ं तु स्वतंत्रता की जो कीमत हमको अदा करनी थी, उसमें यह भी शामिल था। लेकिन अब समय आ गया है जब विद्यार्थियों को आत्मशासन के महत्व को समझना चाहिए।
आज की उच्छृंखलता के बदले में कोई सारवस्तु नहीं मिलती। इतना ही नहीं उससे समाज का अनिष्ट ही होगा। यह उच्छृंखलता युवक के अधिकार को स्वीकार करने से ही दूर होगी। इस संबंध में एक बात और विचारने के योग्य है।
युवक शक्ति का भंडार होता है। जिस परिस्थिति में रहता है, उससे वह अत्यंत प्रभावित होता है। यह भाव-प्रणव होता है तथा शूरता दिखाने की किसी अवस्था को छोड़ना नहीं चाहता। यदि उसका समाज स्वतंत्र होने की चेष्टा कर रहा है तो वह उसी में लग जाता है और यदि उसका समाज सांप्रदायिक युद्ध में लगा है तो वह उसका अगुवा बनना चाहता है।
यदि इस दृष्टि से देखा जाए, तो युवक न प्रगतिशील है और न प्रतिक्रियावादी वह किसी भी नए काम में लगाया जा सकता है। शर्त यह है कि उसकी भावना पूरी होनी चाहिए और उसे काम का