महादेवी वर्मा 10th - - रज-कण पर जल-कण हो बरसी, नवजीवन-अंकुर बन निकली। पथ को न मलिन करना आना, पद-चिह्न न दे जाता जाना, सुधि मेरे आगम की! जग में! सुख की सिहरन हो अन्त खिली!
विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा न कभी अपना होना, परिचय इतना इतिहास यही, उमड़ी कल थी मिट आज चली। कठिन शब्दार्थ:- बदली-मेघ, स्पन्दन-गतिशीलता, कंपन, निस्पंद-स्पंदनहीन, पराग-मकरंद, नभ-आकाश, नव-नवीन, दुकूल-वस्त्र, अविरल-निरंतर, आगम-आना। अभ्यास के लिए प्रश्न . महादेवी वर्मा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
. महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाओं का नाम उल्लेख कीजिए। . मैं नीर भरी दुःख की बदली’ का भाव समझाइये।
. महादेवी वर्मा ने अपने मन की पीड़ा को किस प्रकार प्रस्तुत किया है? . दुःख को सुख में कवयित्री ने किस प्रकार परिणति की है?
. महादेवी वर्मा ने अपना परिचय किस प्रकार दिया। I) सप्रसंग व्याख्या कीजिए। .मेरा पग-पग संगीत भरा,..................
...........................छाया में मलय-बयार पली! .विस्तृत नभ का........................ .......................थी मिट आज चली। II)‘मैं नीर भरी दुःख की बदली’ कविता का सारांश लिखिए।
10th - - कवि परिचय: श्री‘बच्चन’ जी का जन्म इलाहाबाद में हुआ। हिन्दी के लोकप्रिय गीतकारों में आप अग्रगण्य माने जाते हैं। बच्चन जी महान साहित्यकार थे। इनकी कला निष्कपट और निश्छल है।
मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, एकांत संगीत, निशा-निमंत्रण आदि आपकी प्रमुख रचनाएँ हैं। हरिवंशराय ‘बच्चन’ कविता:- पांचजन्य कवि की राष्ट्र-प्रेम संबंधी रचना है जिस तरह श्रीकृष्ण ने महाभारत के भीषण युद्ध में अपना पांचजन्य नामक शंख बजाकर धर्म की जय की घोषणा की, उसी तरह भारत के स्वाधीनता-संग्राम में भारत को विजय देने के लिए कवि पांचजन्य का आह्वान करते हैं। भारत के जन-जन में जिन गुणों की अपेक्षा है, उन पर कवि सुंदर शब्दों में प्रकाश डालते हैं। पांचजन्य, कर पुनः गान।
यह मृतकों का सा देश, बिसराकर अपना वीरवेश, सब शौर्य-शक्ति हो गई नष्ट, बस कायरता रह गयी शेष, बज कर अतीत से एक बार दे सबके अंदर फूँक प्राण, रे पांचजन्य, कर पुनः गान। जर्जर जीवन का हटे भार, तन-मन से हो यौवन प्रसार जन की डाली में पात पत्र गिर पड़ेवेग, आये बहार,