माखनलाल चतुर्वेदी 10th - - कितना बेबस दीखा इसने मिटना सीखा रक्त-रक्त, बिन्दु-बिन्दु झर रहा प्रकाश-सिन्धु कोटि-कोटि बना व्याप्त छोटा-सा घेरा। मोम-दीप मेरा! जी से लग, जब बैठ तम-बल पर जमा बैठ जब चाहूँ जाग उठे जब चाहूँ सो जावे पीड़ा में साथ रहे लीला में खो जावे। मोम-दीप मेरा!
नभ की तम गोद भरे- नखत कोटि;पर न झरे पढ़ न सका, उनके बल जीवन के अक्षर ये, आ न सके उतर-उतर भूल न मेरे घर ये! इनपर गर्वित न हुआ प्रणय गर्व मेरा, मेरे बस साथ मधुर मोम-दीप मेरा! जब चाहूँ मिल जावे जब चाहूँ मिट जावे तम से जब तुमुल युद्ध ठने, दौड़ जुट जावे 10th - - सूझों के रथ-पथ का ज्वलित लघु चितेरा। मोम-दीप मेरा!
यह गरीब, यह लघु-लघु प्राणों पर यह उदार बिन्दु-बिन्दु आग-आग प्राण-प्राण यज्ञ ज्वार पीढ़ियाँ प्रकाश-पथिक जग-रथ-गति-चेरा। मोम-दीप मेरा! कठिन शब्दार्थ: -बेबस-विवश, बल-बल-जलता हुआ, टेरना-बुलाना, नखत-नक्षत्र, तुमुल-भीषण। अभ्यास के लिए प्रश्न .
माखनलाल चतुर्वेदी का परिचय दीजिए। . माखनलाल चतुर्वेदी की प्रमुख रचनाओं का नाम लिखिए। .
माखनलाल चतुर्वेदी अपने आप को क्या मानते है? . मोमदीप की विशेषता बताइये। .
मोम दीप के बारे में कवि की धारणा क्या है? . कवि मोमदीप को सूझ का साथी क्यों मानते हैं? I) सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
.कितना बेबस है................... ........................सूरज का टेरा। .नभ की तम......................... .....................मेरे बस साथ मधुर।
II)‘मोम दीप मेरा’ कविता का सारांश लिखिए। 10th - - कवि परिचय: रामधारी सि ं ह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार प्रांत मुंगेर जिले में स्थित सिमरियाघाट नामक स्थान में हुआ था। इन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के जयद्रथ वध, भारती भारत आदि सेप्रेरित होकर अनेक रचनाएँ की। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के बाद राष्ट्रकवि के रूप में दिनकर का नाम लिया जाता है।
दिनकर क्रांति और विद्रोही भावों के ओजस्वी कवि थे। रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा और कुरुक्षेत्र आपकी श्रेष्ठ रचनाएँ हैं। उनकी भाषा शैली ओज की प्रधानता है। रामधारी सि ं ह ‘दिनकर’ कविता:- कविवर दिनकर जी इस कविता में कलम और तलवार के माध्यम से मानसिक बल और शारीरिक शक्ति का विवेचन करते हैं।
मानव के लिए दोनों ही अनिवार्य है। अज्ञान को हटाने के लिए कलम जरूरी है तो अन्याय को मिटाने के लिए तलवार भी आवश्यक है। कवि के अनुसार वह समाज जो जागृत, सावधान और निर्भय है शस्त्र के बिना भी विजयी बना सकता है। परंतु जब तक ऐसी स्थिति न हो, कलम और तलवार दोनों ही महत्वपूर्ण है।
दो में से क्या तुम्हें चाहिए कलम या कि तलवार? मन में ऊँचे भाव की तन में शक्ति अजय, अपार? अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे, मुझे मीठे गान? या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर जा मैदान?
जला ज्ञान का दीप सिर्फ फैलाओगे उजियाली? अथवा उठा कृपाण करोगे घर की भी रखवाली? कलम देश की बड़ी शक्ति है भाव जगाने वाली, दिल ही नहीं दिमाग में भी आग लगाने वाली,