कुछ नहीं, उसकी संस्कृति का एक-न-एक दिन दिवाला निकल जाता है। इसके विपरीत, जिस जलाशय के पानी लाने वाले दरवाजे बराबर खुले रहते हैं उसकी संस्कृति कभी नहीं सूखती। उसमें सदा ही स्वच्छ जल लहराता और कमल के फूल खिलते रहते हैं। 10th - - कूपमण्डूकता और दुनिया से रूठ कर अलग बैठने का भाव संस्कृति को ले उठता है।
अकसर देखा जाता है कि जब हम एक भाषा में किसी अद्भुत कला को विकसित होते देखते हैं तब तुरंत आसपास पड़ोस या संपर्क वाली दूसरी भाषा में हम उसके उत्स की खोज करने लगते हैं।पहले भाषा में ‘शैली’ और ‘कीड्स’ पैदा होते हैं, तब दूसरी भाषा में ‘रवींद्र’ उत्पन्न होते हैं। पहले एक देश में ‘बुद्ध’ पैदा होते हैं। देश में यीशु मसीह का जन्म होता है। मगर मुसलमान इस देश में नहीं आए होते तो ऊर्दु भाषा का जन्म नहीं होता और ना मोगल-कलम की चित्रकारी ही यहाँ पैदा हुई होती।
अगर यूरोप से भारत का संपर्क नहीं हुआ होता तो भारत की विचारधारा पर विज्ञान का प्रभाव देर से पढ़ता और राम मोहनराय, दयानंद, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, गांधी में से कोई भी सुधारक उस समय जन्म नहीं लेते, जिस समय उनका जन्म हुआ। जब भी दो जातियाँ मिलते हैं उनके संपर्क एवं संघर्ष से जि ं दगी की एक नई धारा फूट निकलती है, इसका प्रभाव दोनों पर पड़ता है।आदान-प्रदान की प्रक्रिया संस्कृति की जान है और इसी के सहारे वह अपनेकोजि ं दा रखती है। केवल चित्र, कविता, मूर्ति, मकान और पोशाक पर ही नहीं, सांस्कृतिक संपर्क का प्रभाव दर्शन और विचार पर भी पड़ता है।एक देश में जो दार्शनिक और महात्मा उत्पन्न होते हैं, उनकी आवाज दूसरे देशों में भी मिलते-जुलते दार्शनिकों और महात्माओं को जन्म देती है। एक देश में जो धर्म खड़ा होता है, वह दूसरे देशों के धर्मों को भी बहुत कुछ बदल देता है।
यही नहीं बल्कि प्राचीन जगत में तो बहुत से ऐसे देवी देवता भी मिलते हैं जो कई जातियों के संस्कारों से निकल कर एक जगह जमा हुए हैं।एक जाति का धार्मिक रिवाज दूसरी जाति का रिवाज बन जाता है और एक देश की आदत