📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 59question

रामधारी सि ं ह ‘दिनकर’ · Part 6

Chapter 16: रामधारी सि ं ह ‘दिनकर’ · Hindi

चर्चित रहे। विभिन्न विश्वविद्यालयों में उन्होंने आचार्य पद पर काम किया और लखनऊ तथा अन्य दो विश्वविद्यालयों में इन्होंने उपकुलपति का कार्यभार भी सफलता से सँभाला। इसके साथ ही साथ राजनीति के क्षेत्र में उन्होंने समाजवाद को जो सैद्धांतिक रूप दिया उसके कारण भी उनको लोग याद करते रहेंगे। आचार्य नरेन्द्र देव उपर्युक्त विविध क्षेत्रों में काम करते समय भारतीय समाज की जो त्रुटियाँ उन्हें दिखाई पड़ी थीं, वर्तमान पीढ़ी की अनुत्तरदायित्वपूर्ण नीति के संबंध में विचार करने पर उन्होंने जो कुछ अनुभव किया था उसे युवकों का समाज में स्थान शीर्षक निबंध में व्यक्त किया है तथा स्पष्ट शब्दों में यह घोषित किया है कि जब तक पुरानी पीढ़ी युवकों को असमर्थ, अविश्वसनीय, अनुत्तरदायी और नालायक समझती रहेगी तब तक समाज में आदर्श अथवा अभीष्ट की स्थापना नहीं हो सकती।

लेखक ने युवकों को भी एक मर्यादा अथवा संहिता के अंदर रखने का प्रयास किया है। तथा उनकी शक्ति, साहस, तेज आदि से उन्हें परिचित कराया है। संक्षेप में प्रस्तुत निबंध के माध्यम से आचार्य जी ने जो कुछ कहा है वह आज के युवाओं और बूढ़ों, दोनों की दृष्टि से पठनीय है तथा विचारणीय भी है। सामान्यतः उन समाजों में, जहाँ स्थिरता आ गई है और जहाँ विकास की गति अत्यंत मंद है, वृद्धों की सबसे अधिक प्रतिष्ठा होती है।

ऐसे समाज में वृद्धों का ही नेतृत्व होता है और उनका अनुभव ही समाज का मुख्य आधार होता है। चीन और भारत के समाज इसके उदाहरण हैं। हमारे पूर्वजों का कहना है कि वह सभा ही नहीं जहाँ वृद्ध नहीं है। ऐसे समाज की शिक्षा प्रणाली में लोक परंपरा का बड़ा महत्व होता है।

वहां शिक्षा के नए प्रकारों की परख का प्रश्न ही नहीं उठता जिनकी संस्कृति और जिनका इतिहास प्राचीन है, उनकी यही कथा है। जब तक समाज के आधारभूत मौलिक सिद्धांतों के परिवर्तन का प्रश्न नहीं उठता और जब तक समाज के आर्थिक ढांचे में क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं होता तब तक यही अवस्था बनी रहती है।

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