📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 41

स̇कलित

Chapter 13: स̇कलित · Hindi

स̇कलित 10th - - सच पूछो तो जाति ही ऐसे ही सुधरे एक-एक व्यक्ति की समिष्टि है। समाज या जाति का एक-एक आदमी यदि अलग-लग अपने को सुधारे तो जाति की जाति या समाज का समाज सुधर जाए। सभ्यता और है क्या। यही कि सभ्य जाति के एक-एक मनुष्य वृद्ध, वनिता सबो में सभ्यता के सब लक्षण पाए जाएं, जिसमें आधे या तिहाई सभ्य हैं वही जाति अशिक्षित कहलाती है।

जातीय उन्नति भी अलग-अलग एक-एक आदमी के परिश्रम, योग्यता, सुचाल और सौजन्य का मानो जोड़ है। उसी तरह जाति की अवनति एक-एक आदमी सुस्ती, कमीनापन, नीची प्रकृति, स्वार्थपरता और भांति-भांति की बुराइयों का बड़ा जोड़ है। इन्हीं गुणों एवं अवगुणों को जाति एवं धर्म के नाम से पुकारते हैं। जैसे सिक्खों में वीरता और जंगली जातियों में लुटेरापन।

जाति गुणों या अवगुणों को सरकार कानून के द्वारा रोक या जड़-मूल से नष्ट-भ्रष्ट नहीं कर सकते हैं, वे किसी दूसरी शक्ल में न सिर्फ फिर से उबर आएंगे वरन् पहले से ज्यादा तरोताजगी और हरियाली की हालत में हो जाएंगे। जब तक किसी जाति के हर एक व्यक्ति के चरित्र में आदि से मौलिक सुधार न किया जाए, तब तक पहले दर्जे का देशानुराग और सर्वसाधारण के हित की आकांक्षा सिर्फ कानून के अदलने-बदलने से या नए कानून के जारी करने से नहीं पैदा हो सकती। जालिम-से-जालिम बादशाह की हुकूमत में रहकर कोई जाति गुलाम नहीं कही जा सकती वरन् गुलाम वही जाति है जिसमें एक-एक व्यक्ति सब भांति कदर्भ, स्वार्थ परायण और जातीयता के भाव से रहित हो। ऐसी जाति जिसकी नस-नस में दास्य भाव समाया हुआ है, कभी उन्नति नहीं करेगी चाहे कैसे ही उदार शासन से वह शासित क्यों न की जाए।

तो निश्चय हुआ कि देश की स्वतंत्रता की गहरी और मजबूत नींव उस देश के एक-एक आदम के आत्मनिर्भरता आदि गुणों पर स्थित है। ऊँचे-से-ऊँचे दर्जे की शिक्षा बिल्कुल बेफायदा है। यदि हम अपने ही सहारे अपनी भलाई न कर सकें। जान स्टुअर्ट मिल का सिद्धांत है कि - राजा का भयानक से भयानक अत्याचार देश पर कभी कोई असर नहीं पैदा कर सकता, जब तक उस देश के एक-एक व्यक्ति में अपने

Related topics

Have a question about this topic?

Get an AI answer grounded in your actual textbook — with the exact page reference.

Ask AI about this topic →