📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 81question

सुदर्शन

Chapter 20: सुदर्शन · Hindi

सुदर्शन 10th - - राजाराम - तुम्हारी बातें मैं खूब समझता हूँ। तुम्हारी इच्छा है मैं उसे कुछ न कहूँ। पर यह कभी न होगा, मैं आज उसकी हड्डियाँ तोड़े बिना रहूँगा, बोलो, कहाँ हैं? राजाराम यही कि यह मेरा बाप नहीं।

कौशल्या चलो, चुप रहे, अगर कल को मुझे कुछ हो जाए, तो इन बच्चों का क्या हो? रो-रोकर मर जाएं तब भी तुमसे आशा नहीं कि इन्हें चुप भी करा जाओ। राजाराम लो, अब मरने को भी तैयार हो गयीं? कौशल्या कैसे आदमी हो, हर समय तने ही रहते हो।

राजाराम यह क्रोध अब उतरेगा भी या नहीं। कौशल्या परमेश्वर ने बच्चे दे दिए, यह बुद्धि न दी कि बालक शरारतें भी क्या करते हैं। बचपन ही में तुम्हारी-सी समझ कहाँ से ले आएँ? राजाराम अगर हुक्म हो तो आज से मारना छोड़ दूँ।

कौशल्या क्यों छोड़ दो? मैं यह कभी न कहूँगी। बाप की तरह मारो, मगर बाप की तरह प्यार भी तो करो। राजाराम और जिसे प्यार करना न आए, वह क्या करें?

मेरे ख्याल में मार-पीट में कर देता हूँ, प्यार तुम कर लिया करो। अब सारा काम मैं ही कैसे कर लूँ? कौशल्या बस, यही तो तुममें ऐब है, हर बात को हँसी में उड़ा देते हो! राजाराम - तो अब हँसना भी पाप हो गया?

कौशल्या सारा दिन देखते-देखते गुजरता है और घर आते ही कोई न कोई ऐसी बात कर देते हो कि देह में आग लग जाए। राजाराम (हँसकर) चलो, आज शादी से कुछ न कहूँगा, अब तो देवी खुश हुई? कौशल्या भी हँसी पड़ी, प्यार-भरी दृष्टि से पति की तरफ देखकर बोली -“अपने कमरे में चलकर कपड़े बदलो, इतने में मैं दूध गरम कर लाऊँ? ” 10th - - शादी के सिर से मुसीबत टल गयी।

इतवार का दिन था। लाला राजाराम धूप में लेटे अख़बार देख रहे थे, इतने में कौशल्या लड़की को लिए हुए आकर उनके पास बैठ गयी और अख़बार छीनकर बोली- “लो सुनो! आज तुम्हारी बिटिया ने एक नयी बात सीखी है।” राजाराम - मालूम होता है, अख़बार न देखने दोगी। बड़ा अजीब लेख है।

कौशल्या इसकी बात उससे भी

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