सब लोग साथ रहते हैं लेकिन जो सच्चे मित्र भलाई चाहते हैं, वे विपत्ति में साथ रह जाते हैं। अतः थोड़े दिनों की विपत्ति भी लाभकारी होती है। अभ्यास के लिए प्रश्न . रहीम के काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। . रहीम ने विपदा को क्यों भली माना है? . रहीम माँगने की वृत्ति के बारे में क्या कहते हैं? . रहीम जिह्वा को नियंत्रण रखने की सलाह क्यों देते हैं? 10th - - कवि परिचय: महादेवी वर्मा का जन्म सन् में फरूखाबाद (उत्तर प्रदेश) में एक सुसंपन्न परिवार में हुआ था। महादेवी जी रहस्यवादी एवं छायावादी कवयित्री ही नहीं कुशल चित्रकार भी थी। आपकी प्रसिद्ध रचना’ यामा’ के लिए आपको ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार मिला है। ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्य गीत’ आदि आपकी रचनाएँ हैं। लोग इनको ‘आधुनिक मीरा’ मानते हैं। महादेवी वर्मा कविता:- इस कविता में कवयित्री महादेवी वर्मा के मन की पीड़ा उभरकर आई है। पर साथ ही उनकी परिणति सुख के रूप में अभिव्यंजित हुई है। दुःख में अंतर्निहित सुख के रूप में वह कभी निर्झरणी बनकर मचलती हैं तो कभी मलय-बयार बनकर बहती है। कभी नवजीवन का अंकुर बनकर विकसित होती हैं तो कभी सुख की सिहरन बनकर खिल उठती हैं, दुःख की बदली सुख बरसाकर, अपना इतिहास रचकर विलीन हो जाती है। कविता में रहस्यवाद की झलक स्पष्ट है। मैं नीर भरी दुःख की बदली! स्पन्दन में चिर निस्पन्दन बसा, क्रन्दन में आहत विश्व हँसा, नयनों में दीपक से जलते पलकों में निर्झरिणी मचली! मेरा पग-पग संगीत भरा, श्वासों से स्वप्न-पराग झरा, नभ के नव रंग बुनते दुकूल, छाया में मलय-बयार पली! मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल, चिन्ता का भार बनी अविरल,
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अब्दुर्रहीम खानखाना · Part 2
Chapter 6: अब्दुर्रहीम खानखाना · Hindi
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