📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 37

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी · Part 3

Chapter 12: आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी · Hindi

कि जिस धन के बिना उनका काम चल गया उसके बिना उनके लड़कों का भी चल जाएगा इस प्रकार बाप-दादे का धन पाकर अनेक लोग बहुधा उसे बुरे कामों में लगा कर खुद भी बदनाम होते हैं और अपने बाप-दादे को भी बदनाम करते हैं। धनवान यदि लोभी है तो उसे रात को वैसे ही नींद नहीं आ सकती, जैसी निर्धन अथवा नीलू भी को आती है धनवान को निर्धन की अपेक्षा में भी अधिक रहता है यदि मनुष्य लोभी है तो थोड़ी संपत्ति वाले से हम अधिक संपत्ति वाले को ही दरिद्री कहेंगे। क्योंकि जिसे रुपयेकीआवश्यकताहैवहउतनादरिद्रीनहींजितना रुपये की आवश्यकता वाला है।कहाँ पाँच और कहाँ सघनताऔर निर्धनता मन की बात है जिनका मन उधार है बे अनुदान और लोभ भी मनुष्यों की अपेक्षा अधिक धनवान है क्योंकि उदारता के कारण उनका धन किसी के काम तो आता है चाहे वह बहुत ही तोड़ा क्यों न हो बहुत धन होकर भी यदि मनुष्य लोभी हुआ और उसका धन किसी के काम ना आया तो उसका होना ना होना दोनों बराबर है शेख सादी ने बहुत ठीक कहा है- “तवङ्गरी बदिलस्त न बमाल” अर्थात अमीरी दिल से होती है, माल से नहीं। शब्दार्थ- मायामय-मायायुक्त, निर्धन-धनहीन, सन्तरी-पहरेदार, निर्लोभी-लोभ रहित, भरमक-एक रोग, निर्धनता- गरीबी।

I) ‘लोभ’ पर आधारित प्रश्न . लोभ किसे कहते हैं लोभ का परिणाम क्या होता है? . आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने लोभ मनोविकार के बारे में क्या कहा?

. लोभ से लाभ नहीं, लेखक के शब्दों में समझाइए। . लोभ-प्रलोभ है समाधान कीजिए।

10th - - II) सही या गलत चुनकर लिखिए संतोष निरोगता का लक्षण है। लोभ बीमारी का लक्षण है लोभी मनुष्य बहुधा धन इकट्ठा करता है।। लोभी मनुष्य जब तक जीते हैं तब तक संतरी सामान अपने धन की रखवाली करते है III) खाली जगह भरिए --------- भी एक प्रकार की बीमारी है जिससे भरसक रोग हो जाता है। किसी न किसी वस्तु की सदैव ------- बनी ही रहती है।

-------- दिल से होती है, माल से नहीं । 10th - - आत्मनिर्भरता (अपने भरोसे पर रहना)

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