हरिवंशराय ‘बच्चन’
Chapter 1: nºÉ´ÉÒÆ EòIÉÉ · Hindi · HI medium
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हरिवंशराय ‘बच्चन’ सुन पड़े चतुर्दिक से नूतन, कोकिल कवियों की नयी तान, रे पांचजन्य, कर पुनः गान। नूतन युग का हो नया राग, ले अनिल पले नूतन पराग उज्जवल अतीत से हो सगर्व पर जगह हृदय में नयी आग, प्राचीन कीर्ति से हो न तुष्ट हम रचें नित्य नूतन महान, रे पांचजन्य, कर पुनः गान। हम चलें विश्व को देने को मानव स्वतंत्रता का संदेश कर्तव्य मार्ग पर दृढ़ रहना, हो एक ध्येय का एक ध्यान रे पांचजन्य, कर पुनः गान। हो पूर्ण विश्व आलस्यहीन हो सब सत्कृत्यों में प्रवीण हम जन्मसिद्ध अधिकारों को लें एक दूसरों से न छीन, पर पापी-शत्रुओं के ऊपर हो खुली नित्य नंगी कृपाण, रे पांचजन्य, कर पुनः गान।
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हरिवंशराय ‘बच्चन’ सुन पड़े चतुर्दिक से नूतन, कोकिल कवियों की नयी तान, रे पांचजन्य, कर पुनः गान। नूतन युग का हो नया राग, ले अनिल पले नूतन पराग उज्जवल अतीत से हो सगर्व पर जगह हृदय में नयी आग, प्राचीन कीर्ति से हो न तुष्ट हम रचें नित्य नूतन महान, रे पांचजन्य, कर पुनः गान। हम चलें विश्व को देने को मानव स्वतंत्रता का संदेश कर्तव्य मार्ग पर दृढ़ रहना, हो एक ध्येय का एक ध्यान रे पांचजन्य, कर पुनः गान। हो पूर्ण विश्व आलस्यहीन हो सब सत्कृत्यों में प्रवीण हम जन्मसिद्ध अधिकारों को लें एक दूसरों से न छीन, पर पापी-शत्रुओं के ऊपर हो खुली नित्य नंगी कृपाण, रे पांचजन्य, कर पुनः गान।
कठिन शब्दार्थ: -पांचजन्य-श्रीकृष्ण का शंख, बिसरकर-बलकर, प्रसार-फैलाव, विस्तार, अनिल-पवन, दृढ़-स्थिर, मजबूत, नूतन-नवीन, आग-वेग, शक्ति, तृष्ट-तृप्त, ध्येय-लक्ष्य, आलस्य-सुस्ती, हीन-रहित। अभ्यास के लिए प्रश्न . पांचजन्य कविता की रचना किसने की? .
कवि पांचजन्य का पुन: गान करने के लिए क्यों कहते हैं? . कवि तन-मन से किसका प्रचार करने के लिए कहते हैं? .
कवियों की नयी तान क्या है? . कवि नित्य क्या करना चाहते हैं? .
कवि नूतन युग में क्या-क्या चाहते हैं? . कवि देश की स्थिति के बारे में क्या कहते हैं? .
कवि पांचजन्य शंख नाद के द्वारा देश के हालत को कैसे सुधारना चाहते हैं? . पांचजन्य कविता में कवि की कामना क्या है? .
कवि इस किवता के द्वारा क्या संदेश देना चाहते हैं? . पांचजन्य कविता का सारांश लिखए? कवि परिचय: माखनलाल चतुर्वेदी जी का जन्म होशंगाबाद जिले (मध्यप्रदेश) के बावई नामक गाँव में हुआ था।
चतुर्वेदी कवि ही नहीं सफल पत्रकार, गद्यकार, और नाटककार भी थे। आपके काव्य-संग्रहों में माता, युग-चरण, समर्पण, मरण- ज्वर आदि बहुप्रशंसित हैं। कवि की सभी रचनाएँ खड़ी बोली हिन्दी में हैं। आपका काव्य-साहित्य, देश-भक्ति, मानव-प्रेम और आध्यात्मिकता का त्रिवेणी संगम है।
माखनलाल चतुर्वेदी कविता:- सूर्य और चन्द्र अपने आलोक से पृथ्वी को आलौकिक करते हैं, पर इन दोनों के प्रभाव में तमाच्छादित भूलोक में, नक्षत्र-मंडल की प्रभा यहाँ तक नहीं पहुँच पाती, उस समय केवल मोम-दीप प्रत्येक बिन्दु के रूप में अपने रक्त की धारा से अपने चारों ओर के परिमित स्थान को प्रकाशित करता है, वह सूर्य-चन्द्र की तरह उदय-अस्त होने वाला नहीं, सुख-दुःख में सदैव साथ रहता है। इच्छा होने पर जाग उठता है और इच्छा होने पर सो जाता है। वह साधु है, गरीब है, अल्प वस्तु है, फिर भी महान् कहे जने वाले अन्य सबसे अधिक उदार है। सूझ का साथी मोम-दीप मेरा!
कितना बेबस है यह जीवन का रस है यह छन-छन, पल-पल, बल-बल छू रहा सबेरा, अपना अस्तिव्त भूल सूरज का टेरा...... मोम-दीप मेरा!
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