📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 33

माखनलाल चतुर्वेदी · Part 2

Chapter 11: माखनलाल चतुर्वेदी · Hindi

जो हमें भीतर ही भीतर विश्व की सेवा और उपयोगिता से रहित करता जाता है। हमारे जीवन की कोमलता, सेवाऔर दोषों सहित खुलेपन का अभाव ही हमारे व्यक्तित्व का अभाव ही है। व्यक्ति वह नहीं जिसका लोगों पर आतंक छाए, व्यक्तित्व वह है जिसकी तस्वीर जमाना अपने आप में खोदता चला जाए। इसी व्यक्तित्व की जरूरत हमें जीवन के शासन आदि अनेक क्षेत्रों में होती है।

उस समय व्यक्तित्व की रक्षा के लिए हमें अपनी लहरों, अपने मनोवेगों, अपनी तौल संभालने के नाम पर तौल बिगाड़ने वाली भीतरी आदतों पर पहरा देने की जरूरत होती है, इसलिए जिससे भीतरी और बाहरी विश्व के बीच हम बे-मेल न हो बैठें। ये दोष भी हृदय की स्वच्छता में झरने की तरह अपने आप बहने वाले शब्द व्यक्तित्व को बर्बाद न कर सकेंगे। हाँ इसमें जीवन के झरने की गति को हम कुछ दिनों गदला और सड़ा हुआ अवश्य कर देंगे। और समय के साथ आने वाली नई धराएँ इस गंदगी को अवश्य धो बहाएंगी।

यदि हम स्वयं उस गंदगी को अधिक दिनों रोके रहने का यत्न करें, तो भी खुले हृदय में हम उसी तरह नुकसान उठाने के लिए बे-काबू हैं। हम सन्निकट स्वार्थ की पूर्ति के लिए ही हृदय का दिवाला काढ़ते हैं और इस प्रयत्न में हम अपनी और अपने सन्निकट स्वार्थ की कब्र बनाते हैं। 10th - - शासन में हम ‘जानकार मन’ का मूल्य कूतकर, उसको बलवान मानकर, उसी को व्यक्तित्व मानकर गर्व करने लगते हैं। परंतु विश्व में व्यक्तित्व ही जानकारों के कुंभीपाक बने हुए हैं।

शासन में व्यक्तित्व, शब्द व्यक्तित्व ही सफल होता है। श्रम, सेवा,स्नेह और आकर्षण विश्वजीतने की ये गुण खुले हृदय के व्यक्तित्व में यह सब होते हैं, सूचनाओं की संग्रहित पिटारी में नहीं। व्यक्तित्व है तो यह सब संग्रह खजाना है, व्यक्तित्व के प्रभाव में यह सारा मिट्टी पत्थरों का ढेर है। सूचनाएं पैसे से खरीदी जा सकती हैं कि ं तु हृदय यानी व्यक्तित्व पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।

हाँ व्यक्तित्व भी व्यक्तित्वके हृदयों के संघर्षण से बढ़ता है। अच्छी आदतों से व्यक्ति बनता है ये ठीक है, कि ं तु उन्हीं अच्छी आदतों से बाहरी और

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