की बात है। घनश्याम मैं दक्षिण न जाता तो अच्छा था। अमरनाथ तुम्हारा दक्षिण जाना तो व्यर्थ नहीं हुआ। यदि न जाने तो इतना धन......
घनश्याम अजी, चूल्हे में जाए धन ऐसा। धन किस काम का? मेरे हृदय में सुख-शांति नहीं तो धन किस मर्ज की दवा है? अमरनाथ ऐं, यह हाथ में लाल डोरा क्यों बाँधा है?
घनश्याम इसकी तो बात ही भूल गया। यह राखी है। अमरनाथ भई, वाह। अच्छी राखी है।
10th - - लाल डोरे को राखी बताते हो। यह किसने बाँधी है? किसी बड़े कंजूस ब्राह्मण ने एक पैसा तक खरचना पाप समझा। डोरे ही से काम निकाला।
घनश्याम संसार में यदि कोई बढ़िया से बढ़िया राखी बन सकती है, तो मुझे उससे भी कहीं अधिक प्यारा यह लाल डोरा है। यह कहकर घनश्याम ने उसे खोलकर बड़े यत्नपूर्वक अपने बक्स में रख लिया। अमरनाथ भई, तुम भी विचित्र मनुष्य हो। आखिर यह डोरा बाँधा किसने है?
घनश्याम एक बालिका ने। अमरनाथ बालिका ने कैसे बाँधा और कहां? घनश्याम - कानपुर में। घनश्याम ने सारी घटना कह सुनाई।
अमरनाथ यदि यह बात है तो सत्य ही यह डोरा अमूल्य है। घनश्याम न जाने क्यों, उस बालिका का ध्यान मेरे मन से नहीं उतरता। अमरनाथ उसकी सरलता तथा प्रेम ने तुम्हारे हृदय पर प्रभाव डाला है। भला उसका नाम क्या है?
घनश्याम नाम तो मुझे नहीं मालूम भीत से किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था। परंतु मैं सुन न सका। अमरनाथ अच्छा, खैर। अब तुमने क्या करना विचारा है?
घनश्याम धैर्य रखकर चुपचाप बैठने के अतिरिक्त और मैं कर ही क्या सकता हूँ? मुझसे जो हो सका, मैं कर चुका। अमरनाथ हाँ, यही ठीक भी है। ईश्वर पर छोड़ दो, देखो, क्या होता है।
पूर्वोत्तर घटना हुई पाँच वर्ष व्यतीत हो गये। घनश्याम पिछली बातें प्रायः भूल गये हैं। परंतु उस बालिका की याद कभी-कभी आ जाती है। उसे देखने वे एक बार कानपुर भी गये थे।
परंतु उसका पता न चला उस घर में पूछने पर ज्ञान हुआ कि वह वहाँ से अपनी माता सहित, बहुत दिन हुए न जाने कहाँ चली गयी। 10th - - इसके पश्चात