📖 Samacheer Kalvi · SSLC - English Medium · Hindi · Page 45question

विष्णु प्रभाकर · Part 4

Chapter 14: विष्णु प्रभाकर · Hindi

नहीं जान पड़ता। (बराबर पेट टटोलता रहता है) माँ : (काँपकर) फोड़ा। डॉक्टर : जी नहीं, वह नहीं है। बिल्कुल नहीं है।

(मोहन से) ज़रा मुंह फिर खोलना जीभ निकालो। (मोहन जीभ निकालता है) हाँ, कब्ज़ ही लगता है। कुछ बदहजमी भी है। (उठते हुए) कोई बात नहीं।

दवा भेजता हूँ। (पिता से) क्यों न आप ही चलें। मेरा विचार है कि एक ही खुराक पीने के बाद तबीयत ठीक हो जाएगी। कभी-कभी हवा रुक जाती है।

और फंदा डाल लेती है। बस उसी की ऐंठन। (डॉक्टर जाते हैं। मोहन के पिता दस का नोट लिए पीछे-पीछे जाते हैं और डॉक्टर साहब को देते हैं।) माँ : से तो दूँ, डॉक्टर साहब?

(दूर से) हाँ, गरम पानी की बोतल से सेंक दीजिए। (डाक्टर जाते हैं, माँ बोतल उठाती है पड़ोसिन आती है) पड़ोसिन : क्यों मोहन की माँ, कैसा है मोहन? माँ : आओ जी, रामू की काकी। कैसा क्या होता।

लोचा-लोचा फिरे है। जाने वह ऐसे-ऐसे दर्द क्या है, लड़के का बुरा हाल कर दिया। पड़ोसिन : पड़ोसिन ना जी, इत्ती नयी-नयी बीमारियाँ निकली हैं। देख लेना, यह भी कोई नया दर्द होगा।

नए-नए बुखार निकल गए हैं। वह बात है कि खाना-पीना तो रहा नहीं। माँ : डॉक्टर कहता है कि बदहज़मी है। आज तो रोटी भी उनके साथ खाकर गया था।

वहाँ भी कुछ नहीं खाया। आजकल तो बिना खाए बीमारी होती है। (बाहर से आवाज़ आती है-‘मोहन! मोहन!’ फिर मास्टर जी का प्रवेश होता है।) माँ : ओह, मोहन के मास्टर जी हैं।

(पुकारकर) आ जाइए! मास्टर : सुना है कि मोहन के पेट में कुछ ‘ऐसे-ऐसे’ हो रहा है क्यों भाई? (पास आकर) हाँ, चेहरा तो कुछ उतरा हुआ है। दादा, कल तो स्कूल जाना है।

तुम्हारे बिना तो क्लास में रौनक ही नहीं रहेगी। क्यों माता जी, आपने क्या खिला दिया था इसे? 10th - - माँ : खाया तो बेचारे ने कुछ नहीं। मास्टर : तब शायद न खाने का दर्द है।

समझ गया, उसी में ‘ऐसे-ऐसे’ होता है। माँ : पर मास्टर जी, वैद्य और डॉक्टर तो दस्त की दवा भेजेंगे। मास्टर : माता जी, मोहन की दवा वैद्य

Related topics

Have a question about this topic?

Get an AI answer grounded in your actual textbook — with the exact page reference.

Ask AI about this topic →