ऐसे-ऐसे’ एकांकी के प्रमुख पात्रों के नाम बताइए? . ‘ऐसे-ऐसे’ एकांकी की विशेषता बताइए? .
मोहन के पेट के दर्द का कारण क्या था और यह दर्द क्यों हुआ? . माँ मोहन के पेट के दर्द से क्यों परेशान हुई और वैद्य से क्या बोली? .
मोहन के ऐसे-ऐसे करने का नतीजा क्या होता है? . वैद्य ने ऐसे-ऐसे कहकर मोहन के पेट दर्द को कैसे दूर किया? .
‘ऐसे-ऐसे’ एकांकी का सारांश लिखिए। 10th - - महात्मा गाँधी के सिद्धांतों में पूर्ण निष्ठा, विश्वास एवं उनको तत्परता से क्रियान्वित करने वाले संत विनोबा एक नैष्ठिक ब्रह्मचारी, प्रखर विद्वान और कर्मठ समाजसेवी रहे गाँधीजी की विभिन्न रचनात्मक प्रवृत्तियों को साकार रूप देने, प्रयोग की कसौटी पर उन्हें कसकर उनकी उपयोगिता को साकार रूप देने तथा प्रभविष्णुता को सिद्ध करने में विनोबा जी का योगदान महत्वपूर्ण रहा। आप स्वभाव से ही अध्ययनशील तथा अध्यासाई थे। निरंतर विकासशीलता विनोबा जी का श्रेष्ठ गुण मना जाता है।
विनोबा जी के विचार, वाणी और आचार की एकरूपता उनको सही माने में संत प्रमाणित करती है। उनकी स्मरण शक्ति अभूतपूर्व रही। संत विनोबा विनोबा जी संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित रहे और मराठी आपकी मातृभाषा होने के कारण उस पर भी आपका पूर्ण अधिकार रहा। विनोबा जी बहुभाषा कोविद थे और उन्हें भारतवर्ष की प्रायः सभी प्रमुख भाषाओं का ज्ञान था।
नपे-तुले आडम्बरहीन शब्दों में अपनी बात व्यक्त कर देना विनोबा जी का खास गुण है। आपके विचार सुलझे हुए, तर्क युक्तिसंगत और कथन स्पष्ट एवं संक्षिप्त होते हैं। आपके कई वाक्य सूत्रबद्ध होते हैं जिनमें गहन आशय छिपा होता है। गागर में सागर भर देने की अद्भुत क्षमता उनमें परिलक्षित होती है।
समाजगत बुराइयों, रुढ़िगत अंधविश्वासों के प्रति एक हल्की-सी चुटकी लेकर ही आपकी वाणी मौन नहीं हो जाती वरन् उन समस्याओं का समुचित समाधान भी हम उसमें पाते हैं। आपकी भाषा, सरल, सुबोध होते हुए भी विषय को पूर्णतया स्पष्ट करने वाली होती है। इनका प्रस्तुत जीवन और शिक्षण निबंध छात्रों, अध्यापकों एवं समाज को आत्म-परीक्षण करने के लिए बाध्य करता है। उनके मतानुसार आज की शिक्षा का सबसे बड़ी दोष यह है कि आधी आयु तक