भीतरी जीवन के मेल-मिलाए रहें, यही मेल मनुष्य के जीवन में आकर्षण, प्रकाश और विश्वास पैदा करता है।हृदय की सरसता अपने संचित ज्ञान और श्रम को लेकर जब विश्व बनाने बैठती है, तब वह व्यक्तित्व का निर्माण करती जाती है और व्यक्तित्व पर मरकर अमर हो जानेवाली दुनिया का भी । शब्दार्थ :– बाध्य- मजबूर, विवश; उघाड़ा-खोला हुआ; अन्तरतम-अन्त:करण ;सौदा करना-क्रय-विक्रय करना; न्योता-निमंत्रण ; बे-इख्तियार-अधिकार रहित ; तवज्जोह-ध्यान, ख्याल ; षड्यंत्र-कुचक्र, साज़िश ; तकल्लुफ़- दिखावटी नम्रता; दलाल-मध्यस्थ; षोडशोपचार-पूजा के सोलह पूर्ण अंग; उपकरण-समान, सामग्री; रूखापन- नीरसता; अतिरेक-अतिशय, ज्यादती; जागीर-राज्य की ओर से प्राप्त भूमि ; सन्निकट-समीप ; कूतना-अनुमान लगाना I) पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए। . माखनलाल चतुर्वेदी व्यक्तित्व किस वस्तु को कहते हैं?
. व्यक्तित्व के अभाव में व्यक्ति का क्या हाल होता है? . व्यक्तित्व की ज़रूरत जीवन के किन-किन क्षेत्रों में होती है?
. अच्छी आदतों से बाहरी और भीतरी जीवन का मेल मनुष्य के जीवन में कैसा असर डालता है? II) टिप्पणी लिखिए व्यक्तित्व की रक्षा III) व्यक्तित्व पाठ का सारांश लिखिए। IV) सही या गलत चुनकर लिखिए .
माखनलाल चतुर्वेदी जी की सभी रचनाएँ खड़ी बोली हिन्दी में हैं। . व्यक्तित्व बाहर अपने आप प्रकट होता है और भीतर संपूर्ण जीवन को संगठित किया करता है . अकड़ और आडंबर का नाम व्यक्तित्व नहीं है 10th - - .
आभूषणों और उपकरणों के बल पर व्यक्तित्व का नारा ही बुलंद किया जा सकता है। . अच्छी आदतों से व्यक्ति बनता है V) खाली जगह भरिए व्यक्तित्व भीतर संपूण जीवन को किया करता है। वह है जिसकी तस्वीर जमाना अपने आप में खोदता चला जाए विष्व में व्यक्तित्व ही जानकारों के बने हुए है।।
10th - - आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी भी उन्हीं दुर्लभ हस्तियों में से थे जिन्होंने आज की हि ं दी के लिए रास्ता बनाया. किसी बड़े और घने दरख़्त की तरह वे एक लंबे समय तक साहित्यिक जगत के सिर पर साया बनकर खड़े रहे. उनकी इस छाया में हि ं दी साहित्य के कई नाम फले-फूले. यह उनका अतुलनीय योगदान ही था जिसके चलते आधुनिक हि ं दी साहित्य का दूसरा युग